छत्तीसगढ़ राज्य, दिनांक 1 नवंबर 2000 को अलग होकर अस्तित्व में आया। छत्तीसगढ़ राज्य के 27 जिले निम्नानुसार हैं:-

रायपुर, धमतरी, बलौदाबाजार , गरियाबंद , बेमेतरा , बालोद , मुंगेली , सूरजपुर , बलरामपुर, सुकमा , कोंडागांव महासमुंद, दुर्ग, राजनांदगांव, कवर्धा, बस्तर, दंतेवाड़ा, कांकेर, रायगढ़, बिलासपुर, जांजगीर-चांपा, कोरबा, जशपुर, अंबिकापुर तथा कोरिया। माह अप्रैल 2007 में जगदल्पुर से पृथक करके नरायणपुर एवं दंतेवाड़ा से पृथक कर बीजापुर का गठन किया गया। इसी प्रकार माह जनवरी 2012 में 9 नवीन जिलों का गठन किया गया। इसमें बस्तर, नरायणपुर, दंतेवाड़ा, बीजापुर,सुकमा ,सूरजपुर , बलरामपुर, कोंडागांव, कांकेर, सरगुजा, कोरिया, कोरबा एवं जशपुर पूर्ण रूप से आदिवासी उपयोजना क्षेत्र के अंतर्गत आते हैं। राज्य में कुल 146 विकासखंड हैं, इनमें आदिवासी विकासखंडों की संख्या 85 है।

छत्तीसगढ़ राज्य में 11 लोकसभा (5 सामान्य, 4 अनुसूचित जनजाति, 2 अनुसूचित जाति) हैं, एवं 90 विधानसभा क्षेत्र हैं। विधान सभा क्षेत्रों में 44 क्षेत्र (34 अनुसूचित जनजाति और 10 अनुसूचित जाति) सुरक्षित हैं।

राज्य की कुल जनसंख्या (जनगणना वर्ष 2011 के अनुसार) 255.45 लाख है। इनमें से अनुसचित जनजातियों की जनसंख्या 78.22 लाख है, एवं अनुसूचित जातियों की जनसंख्या 32.47 लाख है।

राज्य में अनुसूचित जनजातियों के विकास हेतु आदिवासी उपयोजना की अवधारणा जारी है। प्रमुख जनजाति गोंड तथा इसकी उपजातियां-माड़िया, मुरिया, दोरला आदि हैं। इसके अतिरिक्त उरांव, कंवर, बिंझवार, बैगा, भतरा, कमार, हल्बा, संवरा, नगेशिया, मझवार, खरिया और धनवार जनजाति काफी संख्या में हैं।

छत्तीसगढ़ राज्य में 5 विशेष पिछड़ी जनजातियां, बैगा, कमार, हिल कोरबा, बिरहोर, अबूझमाड़िया, निवासरत हैं। इनके आर्थिक सामाजिक तथा क्षेत्रीय विकास को दृष्टिगत रखते हुए राज्य में 6 पिछड़ी जनजाति विकास अभिकरण गठित है।


  1. दायित्व:-
    1. सं‍विधान की पांचवी अनुसूची के अधिकारों और आदिवासी क्षेत्रों के हितों के संरक्षण के लिये प्रहरी के रूप में कार्य करना।
    2. अनुसूचित जाति/जनजाति के शैक्षणिक एवं आर्थिक उत्थान के लिये योजनाओं का संचालन।
    3. आदिवासी उपयोजना तथा विशेष घटक योजन के क्रियान्वयन हेतु विभिन्न विकास विभागों को बजट आबंटन उपलब्ध कराना नोडल एजेन्सी के रूप में कार्य करना एवं योजनाओं का अनुश्रवण करना।
    4. आदिवासी उपयोजना क्षेत्र में प्राथमिक से लेकर उच्चतर माध्यमिक स्तर तक की शैक्षणिक संस्थाओं का संचालन।
    5. विशेष पिछड़े जनजाति समूहों के विकास के लिये योजनाओं का निर्माण एवं क्रियान्वयन।
    6. विशेष केंद्रीय सहायता से संचालित योजनाओं का पर्यवेक्षण, अनुश्रवण एवं मूल्यांकन करना।
    7. पिछड़ा वर्ग एवं अल्प संख्यक कल्याण हेतु भारत सरकार के निर्देशानुसार कार्यक्रमों/योजनाओं का संचालन।

  2. विभाग का कार्य:-
    1. विभागीय अमले से संबंधित समस्त प्रशासकीय कार्य।
    2. आदिम जाति, अनुसूचित जाति तथा पिछड़ा वर्ग के विकास से संबंधित योजनाओं का क्रियान्वयन एवं अनुश्रवण।
    3. उपयोजना क्षेत्र में शैक्षणिक संस्थाओं तथा शैक्षणिक विकास की योजनाओं का संचालन।
    4. आदिम जाति, अनुसूचित जाति तथा पिछड़ा वर्ग के विकास की योजनाओं के लिये बजट आबंटन उपलब्ध कराना। मांग संख्या 33,41,15,64,77,49 एवं 82 के अंतर्गत आदिम जाति, अनसूचित जाति, पिछड़ा वर्ग एवं अल्प संख्यक वर्ग के विकास की योजनाओं का क्रियान्वयन।
    5. आदिवासी उपयोजना तथा विशेष घटक योजना अंतर्गत विभिन्न विभागों को प्राप्त बजट आबंटन को निरंतर समीक्षा एवं योजनाओं का अनुश्रवण।
    6. विशेष केंद्रीय सहायता से संचालित योजनाओं का निर्माण, पर्यवेक्षण एवं मूल्यांकन। केन्द्र प्रवर्तित एवं केंद्र क्षेत्रीय योजनाओं के संचालन का अनुश्रवण।
    7. विशेष पिछड़ी जनजाति समूहों के विकास के लिये योजनाओं का निर्माण एवं क्रियान्वयन।
    8. अनुसूचित जाति, जनजाति के जाति प्रमाण-पत्रों का परीक्षण।
    9. अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम 1989 तथा नागरिक अधिकार संरक्षण 1995 के राज्य में क्रियान्वयन की समीक्षा।

आदिम जाति तथा अनुसूचित जाति विकास विभाग की प्रशासनिक संरचना के अंतर्गत माननीय मंत्री एवं राज्य मंत्री के निर्देशन में विभागीय एवं प्रशासनिक कार्यों का संपादन किया जाता है।


  1. मंत्रालय/सचिवालय:-

    मंत्रालय स्तर पर प्रमुख सचिव/सचिव पद का पद है। यहां राज्य शासन के समस्त प्रशासनिक विभागों के विकास कार्यक्रमों/योजनाओं की समीक्षा की जाती हैं, जो अनुसूचित क्षेत्र एवं उपयोजना क्षेत्र के प्रशासनिक कार्यो की व्यवस्था एवं अनुश्रवण से संबंधित होती है।


    प्रमुख सचिव/सचिव के अधिनस्थ विभागीय कार्यों के संपादन के लिये संयुक्त सचिव, अवर सचिव, उपसचिव, वित्तीय सलाहकार तथा विशेष कर्तव्यस्थ अधिकारी कर्तव्यरत हैं।


  2. विभागाध्यक्ष:-

    आदिम जाति तथा अनुसूचित जाति विकास विभाग का गठन संयुक्त रूप से किया गया है, जिसमें आयुक्त के रूप में विभगाध्यक्ष नियुक्त किया गया है। मुख्यालय स्तर पर आयुक्त के अधीनस्थ संचालक, अपर संचालक, उप-आयुक्त, सहायक आयुक्त कार्यरत हैं।


  3. जिला स्तर:-

    छत्तीसगढ़ राज्य के सभी जिलों में जिलाध्यक्ष, प्रशासनिक कार्य एवं विकास कार्यक्रमों/योजनाओं को विभागीय सहायक आयुक्त के माध्यम से जिलों में एवं परियोजना स्तर पर परियोजना अधिकारी, सहा० परियोजना अधिकारी, मुख्य कार्यपालन अधिकारी, विकास खंड शिक्षा अधिकारी के माध्यम से कार्य संपादित किये जाते हैं।


  4. जिला स्तरीय कार्यालय:-

    प्रदेश के 18 जिलों में विभागीय योजनाओं के क्रियान्वयन के लिये सहायक आयुक्त पदस्थ है। परियोजना स्तर पर एकीकृत आदिवासी विकास परियोजना हेतु 19 पद परियोजना प्रशासक के स्वीकृत है।

    प्रदेश के 85 विकासखंड आदिवासी विकासखंड घोषित है इन विकासखंडा में 85 मुख्य कार्यपालन अधिकारी जनपद पंचायत एवं 85 विकासखंड शिक्षा अधिकारी पदस्थ हैं।