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विशेष पिछड़ी जनजाति

विशेष पिछड़ी जनजाति अभिकरण:-

छत्तीसगढ़ राज्य में 5 विशेष पिछड़ी जनजातियों अबूझमाड़िया, कमार, पहाड़ी कोरबा, बिरहोर एवं बैगा के विकास के लिये विशेष अभिकरण का गठन किया गया है।

विशेष पिछड़ी जाति अभिकरणों में ग्रामों की संख्या तथा जनसंख्या:-

छतीसगढ़ के 10 जिलों में निवासरत इन जनजातियों की संख्या 1,14,483 है। विशेष पिछड़ी जनजातियों के विकास हेतु 6 जिला स्तरीय अभिकरण प्रदेश में गठित है। अभिकरणवार विशेष पिछड़ी जनजातियों की जनसंख्या एवं साक्षरता की स्थिति निम्नानुसार है:-



उपयोजना क्षेत्रों का वि‍स्‍तार एवं जनसंख्‍या:-

विशेष पिछड़ी जनजाति अभिकरणवार जनसंख्या विवरण
(जनगणना 2001 के अनुसार)

क्रमांक अभिकरण का नामजिला ग्रामों की संख्याकुल जनसंख्या(विशेष पिछड़ी जनजाति)
1 बैगा विकास अभिकरण, कवर्धाकवर्धा 22929612
2 बैगा एवं पहाड़ी विकास अभिकरण, बिलासपुरबिलासपुर 6213226
कोरबा 262025
3 पहाड़ी कोरवा विकास अभिकरण, जशपुरजशपुर (हिल कोरवा) 8810725
जशपुर (बिरहोर) 11401
रायगढ़21704
4 पहाड़ी कोरवा विकास अभिकरण, अम्बिकापुरसरगुजा28620630
5 कमार विकास अभिकरण, गरियाबंदरायपुर 18213797
धमतरी813962
6 अबूझमाड़ विकास अभिकरण, नारायणपुरबस्तर20119401
योग 1197114483

विशेष पिछड़ी हुई जनजातियों मे साक्षारता वृध्दि:-

विगत् दशक में (वर्ष 1992-93 वर्ष 2002-03) विशेष पिछड़ी जनजातियों की साक्षारता में उल्लेखनीय वृध्दि हुई है। वर्तमान में प्रत्येक 25 विद्यार्थियों (विशेष पिछड़ी जनजातियों) के लिये एक आवासीय शैक्षणिक संस्था उपलब्ध है। जिसका परिणाम यह है कि विशेष पिछड़ी जनजाति क्षेत्रों में साक्षरता दर में उल्लेखनीय वृध्दि हुई है। जिसका विवरण निम्नानुसार है:-



क्रमांक विशेष पिछड़ी जनजाति का नामसाक्षरता प्रतिशत वर्ष 1992-93साक्षरता प्रतिशत वर्ष 2002-03
1कमार8.82%32.76%
2अबूझमाड़िया2.28%24.24%
3पहाड़ी कोरबा15.55%43.58%
4बैगा7.77%19.81%
5बिरहोर1.81%11.58%